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कृष्ण कान्त भारद्वाज
लेखक एवम् ज्योतिर्विद

10-12-1954 को लाडवा जिला कुरुक्षेत्र (हरियाणा) में जन्म | बाल्यावस्था से ही स्वाध्याय के प्रति लगाव | कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में स्नातक | ज्योतिष क्षेत्र में लगभग 30 वर्ष का व्यवहारिक अनुभव | कादम्बिनी एवम् कल्याण ज्योतिष विशेषांक में अनेक लेख प्रकाशित | Vedic Astrology ब्लॉग के माध्यम से निशुल्क परामर्श सेवा | ज्योतिष साहित्य पर निम्नलिखित छह ग्रन्थ प्रकाशित | ब्लॉग astropoint.wordpress.com पर निःशुल्क परामर्श सेवा |
प्रकाशित ग्रन्थ :-
1 जन्मकुंडली फलित दर्पण (मनोज प्रकाशन बुराड़ी दिल्ली)

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प्रथम प्रकाशित ग्रन्थ जिसमें मुख्यतः जन्म कुंडली के निर्माण की विस्तृत विधि उदाहरण सहित सरल भाषा में दी गयी है | इसके अतिरिक्त जन्म कुंडली के शुभाशुभ फल को निश्चित करने की विधि तथा मूल सिद्धांतों का वर्णन किया गया है | सभी online shopping channels पर उपलब्ध |

2 बृहत् ज्योतिष ज्ञान (मनोज प्रकाशन बुराड़ी दिल्ली)

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इस ग्रन्थ में ज्योतिष के गणित, फलित प्रकरण के अतिरिक्त वास्तु शास्त्र ,मेलापक , मुहूर्त, ग्रह पीड़ा निवारण के शास्त्रीय उपायों का वर्णन किया गया है | यह ग्रन्थ ज्योतिष शास्त्र का अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों के लिए क्रमवार ज्ञान कराने वाले मार्ग दर्शक के रूप में है | सभी online shopping channels पर उपलब्ध |
3 प्रश्न फल निर्णय (मनोज प्रकाशन बुराड़ी दिल्ली)

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जन्म समय के ठीक से याद न होने पर प्रश्न कुंडली द्वारा वर्तमान,भूत और भविष्य का ज्ञान कराने वाला यह अपूर्व ग्रन्थ है जिसमें प्रश्नकालिक लग्न के अतिरिक्त होरा, स्वर,शकुन,तथा चेष्टाओं से शुभाशुभ विचार करने का विस्तृत वर्णन किया गया है | सभी online shopping channels पर उपलब्ध |
4 विंशोत्तरी दशाफल निर्णय (मनोज प्रकाशन बुराड़ी दिल्ली)

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जन्मकुंडली के आधार पर विंशोत्तरी दशाओं का विश्लेषण तथा संभावित शुभाशुभ फल का समय कैसे निश्चित करें इसका वर्णन प्राचीन जातक फलित ग्रंथों के विस्तृत अध्ययन तथा मनन के आधार पर किया गया है | सभी online shopping channels पर उपलब्ध |
5 ज्योतिष निबंधमाला ( Educreation Publishing Bilaspur Chhattisgarh)

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वैदिक ज्योतिष में वर्णित नवग्रह वर्णन, सन्तान सुख, व्यवसाय ,रोग, आर्थिक स्थिति ,रत्न धारण इत्यादि उपयोगी तथा महत्वपूर्ण विषय 32 निबंधों की माला में पिरो कर प्रस्तुत किया गया यह एक संग्रहणीय ग्रन्थ है | प्रत्येक निबंध में विस्तृत तथा विश्लेष्णात्मक विवेचन सरल एवम् बोधगम्य भाषा में किया गया है | यह ग्रन्थ सभी online shopping channels पर तथा https://www.educreation.in/store/jyotish-nibandhmala-krishan-kant-bhardwaj.html लिंक पर उपलब्ध होगा |

6 The Essence of Vedic Astrology (Educreation Publishing Bilaspur Chhattisgarh)

 

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अंग्रेजी भाषा में लिखे गये वैदिक ज्योतिष पर आधारित इस ग्रन्थ का विमोचन 15/5/2017 को थानेसर (कुरुक्षेत्र ) के विधायक माननीय श्री सुभाष सुधा के करकमलों द्वारा अपने निवास स्थान पर किया गया है | पुराणों, संहिताओं तथा प्राचीन ज्योतिष ग्रंथों का सार इस ग्रन्थ में समाहित किया गया है | निश्चित ही यह ग्रन्थ पाठकों के ज्ञान में वृद्धि करने वाला होगा | यह ग्रन्थ सभी online shopping channels पर तथा https://www.educreation.in/store/the-essence-of-vedic-astrology-krishan-kant-bhardwaj.html लिंक पर उपलब्ध होगा |

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जन्मकुंडली श्री अरविन्द केजरीवाल


Vedic Astrology - By Krishan Kant Bhardwaj

जन्मकुंडली श्री अरविन्द केजरीवाल

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श्री अरविन्द केजरीवाल जी की उपलब्ध जन्मकुंडली के अनुसार वर्तमान गुरु की महादशा में मंगल की अन्तर्दशा 17-4-17 से 24-3-18 तक रहेगी | मंगल वृष लग्न के लिए अशुभ तथा नीच राशि में तृतीय भाव में है जो चतुर्थ भाव( जनता,लोकप्रियता,जनसमर्थन तथा मित्र वर्ग ) का 12 वां अर्थात हानि का स्थान है अतः इस अवधि में बहुत से मित्र साथ छोड़ देंगे, लोकप्रियता तथा जनसमर्थन में भारी गिरावट आएगी | भाग्य की प्रतिकूलता रहेगी | तृतीय स्थान से श्रवण तथा कंठ  का विचार होता है अतः नीचस्थ मंगल से गले में पीड़ा तथा खांसी का कुप्रभाव अधिक रहेगा तथा कुछ  अशुभ समाचार सुनने पड़ेंगे |मंगल की दशम पर दृष्टि से  सत्ता तथा प्रभाव इस अवधि में क्षीण होते जायेंगे | कुंडली में भाग्येश तथा दशमेश शनि नीच राशि में हानि के स्थान पर स्थित है जिस से यह स्पष्ट है की वे राजसत्ता का उचित…

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जन्मकुंडली श्री अरविन्द केजरीवाल


जन्मकुंडली श्री अरविन्द केजरीवाल

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श्री अरविन्द केजरीवाल जी की उपलब्ध जन्मकुंडली के अनुसार वर्तमान गुरु की महादशा में मंगल की अन्तर्दशा 17-4-17 से 24-3-18 तक रहेगी | मंगल वृष लग्न के लिए अशुभ तथा नीच राशि में तृतीय भाव में है जो चतुर्थ भाव( जनता,लोकप्रियता,जनसमर्थन तथा मित्र वर्ग ) का 12 वां अर्थात हानि का स्थान है अतः इस अवधि में बहुत से मित्र साथ छोड़ देंगे, लोकप्रियता तथा जनसमर्थन में भारी गिरावट आएगी | भाग्य की प्रतिकूलता रहेगी | तृतीय स्थान से श्रवण तथा कंठ  का विचार होता है अतः नीचस्थ मंगल से गले में पीड़ा तथा खांसी का कुप्रभाव अधिक रहेगा तथा कुछ  अशुभ समाचार सुनने पड़ेंगे |मंगल की दशम पर दृष्टि से  सत्ता तथा प्रभाव इस अवधि में क्षीण होते जायेंगे | कुंडली में भाग्येश तथा दशमेश शनि नीच राशि में हानि के स्थान पर स्थित है जिस से यह स्पष्ट है की वे राजसत्ता का उचित उपयोग करने तथा यश प्राप्त करने में असमर्थ रहेंगे | 12-8-17 से 5-10-17 तक मंगल में शनि का प्रत्यंतर केजरीवाल जी के लिए अधिक अशुभ हो सकता है |

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अपने को भीड की आँखों से मत देखो


हम अपना जीवन प्रायः दूसरों के दृष्टिकोण के अनुसार ही जीते हैं |हमारा रहन सहन,खान पान तथा व्यवहार सभी कुछ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बाहर से ही प्रभावित रहता है अर्थात हम अपने आप को अपने नेत्रों से नहीं भीड़ के नेत्रों से देखते हैं |अंतिम मुग़ल सम्राट बहादुर शाह जफ़र ने एक बार मिर्जा ग़ालिब को भोजन का निमंत्रण दिया | ग़ालिब के वस्त्रों पर पैबंद लगे हुए थे और नये वस्त्रों के लिए धन नहीं था |उसके मित्रों ने परामर्श दिया की बादशाह की दावत में ऐसे  फटे हुए वस्त्र डाल कर जाना उचित नहीं होगा अतः कहीं से अच्छे वस्त्र उधार या किराये पर ले लेना ठीक रहेगा |ग़ालिब  अपने मन के अनुसार ही चलते थे अतः अपने मित्रों की इस  सलाह पर ध्यान नहीं  दिया |  उन्हीं वस्त्रों को अच्छी  तरह धुलवा कर पहन लिया और बादशाह से मिलने चल दिए |पहरेदार  ने मिर्जा साहिब को उनके वस्त्रों के कारण भीतर जाने से रोक  दिया |मिर्जा ने  बहुत कहा की आज बादशाह सलामत ने ही  उन्हें  दावत पर निमंत्रित किया है | पर पहरेदार नहीं माने | मिर्जा वापिस गये और अपने किसी मित्र से अच्छे कीमती वस्त्र उधार ले कर पहन लिए | अब पहरेदार  उनको सम्मान पूर्वक बादशाह के पास ले गया |दस्तरखान बिछ गया और बादशाह तथा मिर्जा ग़ालिब को स्वादिष्ट शाही व्यंजन परोसे गये | बादशाह के सामने बैठे ग़ालिब भोजन को अपने  वस्त्रों को खिलाने लगे |बादशाह अचंभित ! हैरान  होते  हुए बादशाह ने पूछा ,” मियाँ ! ये क्या कर रहे हो ?” मिर्जा ग़ालिब ने बड़ी सादगी से उत्तर दिया ,” बादशाह सलामत , ग़ालिब को तो आपके पहरेदारों ने भीतर ही आने नहीं दिया था | अब ये उधार के कीमती  वस्त्र मेहमान बन कर आये हैं अतः शाही दावत खाने के असली  हकदार भी यही  हैं |” बादशाह ने स्वीकार किया कि वस्त्रों के आधार पर  किसी के वास्तविक व्यक्तित्व तथा चरित्र का अनुमान  नहीं लगाना चाहिए तथा प्रत्येक व्यक्ति को   अपना जीवन अपने दृष्टिकोण के अनुसार  ही जीना चाहिए  दूसरों के दृष्टिकोण के अनुसार नहीं |

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क्या श्री राहुल गाँधी कभी भारतीय राजनीति के क्षेत्र में सफलता के शिखर पर पहुँच सकते हैं ?


क्या श्री राहुल गाँधी कभी भारतीय राजनीति के क्षेत्र में सफलता के शिखर पर पहुँच सकते हैं  ?

श्री राहुल गाँधी

 

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श्री राहुल गाँधी जी की उपलब्ध जन्मकुंडली के अनुसार तो कुछ कठिन लगता है | उनका जन्म वृष लग्न में हुआ है और भाग्य तथा कर्म भावों का स्वामी शनि षड्बल से रहित, नीच राशि में हानि के भाव अर्थात 12वें भाव में स्थित है | यद्यपि दशम भाव में स्थित राहु उन्हें राजनीति में सक्रिय तो रखेगा पर सफलता में संदेह ही रहेगा |  जन्मकुंडली में वृष लग्न के लिए योगकारक निर्बल शनि की यही  स्थिति उनके यश मान, पितृसुख, सफलता, नेतृत्व क्षमता तथा उच्चराज्यपद प्राप्ति में बाधक तथा भाग्योत्थान में अवरोधक  है | वाणी के स्थान पर स्थित मंगल तथा सूर्य पर शनि की दृष्टि तथा वाणी के कारक तथा दूसरे भाव के स्वामी का पाप कर्तरी योग से पीड़ित होने के कारण वे अपने वाक् क्षमता से जनता को प्रभावित नहीं कर सकेंगे | उनकी जन्म राशि वृश्चिक पर इस समय शनि की उतरती हुई साढ़ेसाती भी चल रही है | कुंडली में शनि के निर्बल तथा अशुभ अवस्था में होने से साढ़ेसाती का कुप्रभाव भी अधिक पड रहा है| इस समय नीचस्थ चंद्रमा की ही महादशा चल रही है जो  24-10-17 तक रहेगी | अतः 24-10-17 तक कि दशा तथा गोचर दोनों ही  प्रतिकूल हैं |  24-10-17 से 23-10-24 तक मंगल दशा भी राहुल गांधी के लिए बहुत अशुभ तथा भय कारक रहेगी क्योंकि मंगल मारकेश है तथा अस्त हो कर मारक स्थान पर ही स्थित है तथा नीचस्थ शनि से दृष्ट है जिसके कारण इस दशा में शरीर को कष्ट तथा भय रहेगा |

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Key principles of Vastu Shastra


The house provides us enjoyment of happy life with woman and children, helps in our religion, finances and amorousness. It is a dwelling place of organisms, giving us protection from cold, rain and sun and fruitful of all virtues. Therefore house should be constructed at first according to Vishwakarma and other sages.                                                        Vaasturaajavallabh

In ancient and famous Sanhita and architectural texts, several rules have been mentioned for construction of a house.  House will be beneficial and auspicious in every field of life if these following classical rules are applied in house building.

Village or town compatibility

At first, be sure in the classical manner that the village or city you want to reside in, is compatible or not for you. According to Jyotissar if the sign of name of the village or town is 2, 5, 9, 10,11th from the sign of famous name of a person then it should be considered auspicious.If name’s sign of the village or town is 7th from the sign of famous name of a person there will be hostility, if 3rd or 6th there will be loss and if 4, 8 or12th there will be diseases.Test of landgrhamadhyehastamitan khaatva paripooritan punahshvabhram | yadyoonnamanishtan tatsame saman dhanyamadhikan yat |                                                                                                                                                                  (Brihatsanhita)

To examine the land for building a house a person should dig a pit of length, width and depth of his own arm in the middle of the ground. Then fill the pit with the same soil. If the soil is saved while filling the pit, it is auspicious, if soil is less then inauspicious and neither good nor bad if it is evenly filled. Land inclined towards east, north and north east directions is considered auspicious. Land near a river, the anthill, torn, the intersection of roads and temple is not considered auspicious for the house.  Coal, bone, hair, ash, straw, cotton and leather etc. should be removed from the plot under construction otherwise residents of that home are suffered from hardships.According to Vastu Ratnavali there will be growth if copper etc. metals, stone, brick or gold is found while digging the pit, comforts if found the money, misery and conflict if found clamshell, disease and fear if found cotton or burnt wood and fear of death if found  straw , bone, ash, egg, snake or iron.( contd…….)

( Read full text in my coming book” The Essence of Vedic Astrology”)

 

 

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astropoint.wordpress.com के समस्त  प्रबुद्ध पाठकों को दीपावली के शुभ पर्व पर हार्दिक शुभ कामनाएं |27_10_2016-diwalidiya

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