बुध ग्रह पुराणों व ज्योतिष शास्त्र में

   बुध ग्रह पुराणों व ज्योतिष शास्त्र में

 

बुधग्रह की उत्पत्ति का पौराणिक वृत्तांत

बुध कि उत्पत्ति का वर्णन पद्म ,मत्स्य ,मार्कंडेय ,विष्णु एवम ब्रह्म आदि अनेक  पुराणों में मिलता है |जगतपिता ब्रह्मा जी के पुत्र प्रजापति अत्रि  थे |अत्रि के पुत्र चंद्रमा हुए जिनको ब्रह्मा जी ने नक्षत्रों व औषधियों का अधिपति बनाया |चन्द्र ने राजसूय यज्ञ के अनुष्ठान से दुर्लभ ऐश्वर्य व सम्मान प्राप्त किया जिसे पा कर उसे मद हो गया |उसकी बुध्धि भ्रष्ट हो गयी और मदांध हो कर एक दिन अनितिपूर्वक देवगुरु बृहस्पति कि पत्नी तारा का अपहरण कर लिया|देवों तथा ऋषि मुनियों ने चन्द्र को समझाने का बहुत यत्न किया पर काम के वशीभूत होने के कारण उसने एक न सुनी |अंत में देवराज इंद्र ,रूद्र व देवसेना ने देवगुरु को न्याय दिलाने के लिए चन्द्र पर चढाई कर दी |  बृहस्पति का विरोधी होने के कारण शुक्राचार्य ने दैत्य व दानवों सहित चन्द्र का पक्ष लिया |तारकमय नामक भीषण संग्राम हुआ |सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड इस भयानक देवासुर संग्राम से पीड़ित हो गया | ब्रह्मा जी ने   मध्यस्थता करके दोनों  पक्षों में सुलह करा दी तथा देवगुरु को उनकी पत्नी वापिस दिला दी |

                 जिस समय तारा कि वापसी हुई उस समय वह गर्भवती थी |यह जान कर बृहस्पति बहुत कुपित हुए |उन्हों ने तारा को गर्भ त्याग करने का आदेश दिया |पति के आदेश कि पालना करते हुए तारा ने वह गर्भ एक तृण समूह में त्याग दिया |वह बालक अत्यंत सुंदर व तेजस्वी था | देवताओं के प्रश्न करने पर तारा ने उस बालक का पिता चंद्रमा को बताया | यह सुन कर चन्द्र ने उस बालक को अपना लिया और उसका नाम बुध रख दिया | ब्रह्मा जी ने बुध को नवग्रह मंडल में स्थान दिया |ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति कि  बुध से शत्रुता का कारण इसी कथा में छुपा हुआ है |

बुध का विवाह

पुराणों के अनुसार वैवस्वत मनु के वंश में इल नाम का एक राजा हुआ | एक बार राजा इल शिकार के लिए एक वन में गए|उस वन में एक स्थान भगवान शंकर और पार्वती कि रति क्रीडा  के लिए सुरक्षित था जिसे अम्बिका वन कहा जाता था | उस स्थान पर शिव ,कार्तिकेय ,गणेश व नंदी के सिवाय कोई अन्य  पुरुष प्रवेश  नहीं कर सकता था| किसी भी अन्य पुरुष के प्रवेश करने पर उसका स्त्री रूप हो जाना निश्चित था |राजा इल अनभिज्ञता वश उस आरक्षित स्थान में चले गए तथा स्त्री रूप में परिवर्तित हो गए |उसी स्थान पर किसी यक्षिणी से उन्हें उस शाप के बारे में ज्ञान हुआ | काल कि गति को स्वीकार कर उन्हों ने अपना नाम इला रख लिया तथा स्त्री रूप व स्वभाव अपना लिया |

अम्बिका वन से बाहर आने पर इला का मिलन सोम पुत्र बुध से हुआ |दोनों एक दूसरे में आसक्त हो गए तथा विवाह बंधन में  बंध गए |कालान्तर में इला के गर्भ से चन्द्र वंश कि वृध्धि करने वाला तेजस्वी पुत्र हुआ जिसका नाम पुरुरवा रखा गया | बाद में शिव व पार्वती कि आराधना करके इला ने अपने पूर्व पुरुषत्व कि प्राप्ति कर ली और फिर से इल बन कर अपने राज्य में चले गए |

पुराणों में बुध का स्वरूप और प्रकृति

मत्स्य पुराण के अनुसार बुध कनेर के पुष्प के अनुसार कान्ति वाला ,पीत रंग के पुष्प व वस्त्र धारण करने वाला तथा मनोहर रूप वाला है | नारद पुराण के अनुसार बुध त्रिदोष युक्त,हास्य प्रिय,एवम,अनेकार्थी शब्दों का प्रयोग करने वाला है |

 ज्योतिष शास्त्र में बुध का स्वरूप और प्रकृति

बृहत् पाराशर ,सारावली ,फलदीपिका आदि ग्रंथों के मतानुसार बुध सुन्दर ,हास्य प्रिय ,वात-पित्त-कफ प्रकृति का ,कार्य करने में चतुर,मधुर भाषी ,रजोगुणी,विद्वान, त्वचा व नस प्रधान शरीर वाला ,  कला कुशल ,सांवले रंग का तथा हरे रंग के वस्त्र धारण करने वाला है |

बुध ग्रह कि गति

गरुड़ व विष्णु पुराण के अनुसार बुध का रथ वायु एवम अग्नि से निर्मित है | उसमें वायु के समान वेग वाले अश्व जुते हैं जिनका रंग भूरा है |भागवत पुराण के अनुसार बुध कि स्थिति शुक्र से 2 लाख योजन ऊपर है |जब बुध सूर्य कि गति का उल्लंघन करता है तब पृथ्वी पर सूखा या अतिवृष्टि का योग होता है | स्थूल रूप से बुध एक राशि में 25 दिन तक संचार करता है |

वैज्ञानिक परिचय

रोमन मिथको के अनुसार बुध व्यापार, यात्रा और चोर्यकर्म का देवता , युनानी देवता हर्मीश का रोमन रूप , देवताओ का संदेशवाहक देवता है। इसे संदेशवाहक देवता का नाम इस कारण मिला क्योंकि यह ग्रह आकाश मे काफी तेजी से गमन करता है।बुध सौर मंडल का सूर्य से सबसे निकट स्थित और आकार मे सबसे छोटा ग्रह है। यह सूर्य की एक परिक्रमा करने मे ८८ दिन लगाता है। यह लोहे और जस्ते का बना हुआ हैं। यह अपने परिक्रमा पथ पर २९ मील प्रति क्षण की गति से चक्‍कर लगाता हैं।बुध सूर्य के सबसे पास का ग्रह है और द्रव्यमान से आंठवे क्रमांक पर है।इसकी सूर्य से दूरी ४६,०००,००० किमी(perihelion ) से ७०,०००,००० किमी(aphelion) तक रहती है। जब बुध सूर्य के निकट  होता है तब उसकी गति काफी धीमी  होती है। बुध का कोई भी ज्ञात चन्द्रमा नही है। |बुध सामान्यतः नंगी आंखो से सूर्यास्त के बाद या सूर्योदय से ठीक पहले देखा जा सकता है।

ज्योतिष शास्त्र में बुध

ज्योतिष शास्त्र में  बुध  को सौम्य  ग्रह की श्रेणी में रखा गया है | राशि मंडल में इसे मिथुन  और कन्या  राशियों का स्वामित्व प्राप्त है | यह कन्या  राशि में1-15 डिग्री उच्च का 16-20 मूल त्रिकोण का तथा शेष राशि में स्व गृही  तथा कर्क में नीच का होता है | बुध अपने स्थान से सातवें स्थान को पूर्ण दृष्टि से देखता है |सूर्य व शुक्र से मैत्री ,मंगल गुरु  व शनि से समता तथा चन्द्र से शत्रुता रखता है | | बुध अपने वार ,स्व नवांश,स्व द्रेष्काण,स्व तथा उच्च राशि , दिन एवम रात्रिकाल में ,उत्तर दिशा में बलवान होता है |

कारकत्व 

बुध बुध्धि ,विद्या ,चतुराई ,मामा ,मित्र ,वाणी ,कुमार अवस्था,त्वचा,हरे पदार्थ,पन्ना,दूत कर्म ,हास्य,ज्योतिष विद्या,गणित, कला-कौशल,व्यापार,लेखन,बीमा,संचार के साधन,यंत्र –मन्त्र-तंत्र,कूटनीति,लिपिक,शिक्षक,कराधान,मुद्रा विनिमय ,पुस्तक विक्रेता, आढ़तदलाली,डाक –तार विभाग आदि का कारक है |

रोग  

जनम कुंडली में  बुध  अस्त ,नीच या शत्रु राशि का ,छटे -आठवें -बारहवें  भाव में स्थित हो ,पाप ग्रहों से युत  या दृष्ट, षड्बल विहीन हो तो  उदर रोग,त्वचा विकार ,विषम ज्वर ,कंठ रोग, बहम,कर्ण एवम नासिका रोग, पांडू,संग्रहणी,मानसिक रोग, वाणी में दोष,इत्यादि रोगों से कष्ट हो सकता है |

फल देने का समय

बुध अपना शुभाशुभ फल  32-36 वर्ष कि आयु में एवम अपनी दशाओं व गोचर में प्रदान करता है | कुमार अवस्था पर भी  इस का अधिकार कहा गया है |

बुध का राशि फल

जन्म कुंडली में बुध का मेषादि राशियों में स्थित होने का फल इस प्रकार है :-

मेष में – बुध हो तो जातक कृश देह वाला,धूर्त ,विग्रह प्रिय , नास्तिक, दाम्भिक,मद्यपान करने वाला, जुआरी,,नृत्य संगीत में रूचि रखने वाला ,असत्य भाषी ,लिपि का ज्ञाता ,परिश्रम से प्राप्त धन को नष्ट करने वाला ,रति प्रिय,ऋण व बंधन भोगने वाला,कभी चंचल तो कभी स्थिर स्वभाव का होता है |

वृष   में  बुध  हो तो जातक कार्य में दक्ष ,विख्यात,शास्त्र का ज्ञाता ,वस्त्र अलंकार व सुगंध प्रेमी ,स्थिर प्रकृति,उत्तम स्त्री व धन से युक्त,मनोहर वाणी वाला ,हास्य प्रेमी व वचन का पालन करने वाला होता है |

मिथुन में  बुध हो तो जातक ,बहुत विषयों का ज्ञाता ,शिल्प कला में कुशल, ,धर्मात्मा ,बुद्धिमान,प्रिय भाषी,कवि,अल्प रतिमान,स्वतंत्र,दानी,पुत्र,-मित्र युक्त ,प्रवक्ता एवम अधिक कार्यों में लीन होता है |

कर्क में बुध  हो तो जातक प्राज्ञ ,विदेश निरत,रति व गीत संगीत में चित्त वाला,स्त्री द्वेष के कारण नष्ट धन वाला,कुत्सित,चंचल,अधिक कार्यों में रत,अपने कुल कि कीर्ति के कारण प्रसिद्ध,बहु प्रलापी जल से धन लाभ प्राप्त करने वाला तथा अपने बन्धु-बांधवों से द्रोह करने वाला होता है |

सिंह में  बुध हो तो जातक कला व ज्ञान से हीन,असत्यवादी, अल्पस्मृतिवान ,स्वतंत्र,अपने कुल का विरोधी तथा दूसरों को स्नेह करने वाला, दुष्कर्मी,सेवक,संतान सुख से वंचित होता है |

कन्या में बुध  हो तो जातक धर्म प्रिय,प्रवक्ता,चतुर,लेखक,कवि,विज्ञान –शिल्प निरत,मधुर,पूज्य,अपने गुणों के कारण प्रसिध्ध , अपने कार्य के लिए अनेक युक्तियों का प्रयोग करने वाला तथा उदार  होता है |

तुला मे बुध  हो तो जातक शिल्पकार,विवादी,वाक् चतुर,इच्छानुसार व्यय करने वाला ,अनेक दिशाओं में व्यापार करने वाला ,अतिथि-देव-गुरु-ब्राह्मण भक्त,चापलूसतथा जल्दी ही क्रोधी या शांत हो जाने वाला होता है |

वृश्चिक में बुध  हो तो जातक परिश्रमी,शोकयुक्त,द्रोही,जुआरी,मद्यपान करने वाला ,घमंडी , त्यक्त धर्मा,दुष्ट स्त्री भोक्ता, ,लज्जाहीन,मूर्ख,लोभी,कपटी,नीच कार्यों में लीन,ऋणी,अधम जनों में प्रीति व दूसरों कि वस्तुओं को लेने वाला होता है |

धनु में बुध हो तो जातक विख्यात , यथार्थ वक्ता ,उदार,गुणी,शास्त्र का ज्ञाता ,वीर,शील,मंत्री,पुरोहित,कुल मेंप्रधान,महा पुरुष,अध्यापक ,वाक् चतुर,दानी व्रती,व लेखक होता है |

मकर में बुध हो तो जातक,अधम,मूर्ख ,नपुंसक,कुल के गुणों से रहित,दुखी,स्वप्न में विहार करने वाला,चुगल खोर,असत्यवादी,अस्थिर, ऋणी,डरपोक,मलिन व बंधुओं से त्यक्त होता है |

 कुम्भ में बुध हो तो जातक करे हुए कार्य का त्यागी ,शत्रु पीड़ित,अपवित्र,डरपोक,भाग्यहीन,दूसरों कि आज्ञा कापालन करने वाला,नपुंसक होता है |

मीन में  बुध हो तो जातक निर्धन विदेश वासी,सिलाई के काम में निपुण ,विज्ञान व कला से हीन ,परधन संचय में दक्ष,सज्जनों का प्रेमी होता है |

(बुध पर किसी अन्य ग्रह कि युति या दृष्टि के प्रभाव से उपरोक्त राशि फल में परिवर्तन भी संभव है| )

बुध का सामान्य  दशा फल

जन्म कुंडली मेंबुध  स्व ,मित्र ,उच्च राशि -नवांश का ,शुभ भावाधिपति ,षड्बली ,शुभ युक्त -दृष्ट हो तो बुध की शुभ दशा में मित्रों से समागम ,यश प्राप्ति,वाणी में प्रभाव व अधिकार, बुध्धि कि प्रखरता,विद्या लाभ,परीक्षाओं में सफलता ,हास्य में रूचि,सुख-सौभाग्य ,गणित-वाणिज्य-कंप्यूटर-सूचना विज्ञान आदि क्षेत्रों में सफलता ,व्यापार में लाभ ,स्वाध्याय में रूचि,पद प्राप्ति व पदोन्नति होती है | लेखकों,कलाकारों,ज्योतिषियों,शिल्पकारों ,आढतियों ,दलालों के लिए यह दशा बहुत शुभ फल देने वाली होती है |जिस भाव का स्वामी बुध होता है उस भाव से विचारित कार्यों व पदार्थों में सफलता व लाभ होता है |

यदि बुध अस्त ,नीच शत्रु राशि नवांश का ,षड्बल विहीन ,अशुभभावाधिपति  पाप युक्त दृष्ट हो तो  बुध  दशा में मनोव्यथा,स्वजनों से विरोध ,नौकरी में बाधा,कलह, मामा या मौसी को कष्ट ,त्रिदोष विकार ,उदर रोग त्वचा विकार विषम ज्वर कंठ रोग  बहम कर्ण एवम नासिका रोग पांडु रोग  संग्रहणी मानसिक रोग  वाणी में दोष इत्यादि रोगों से कष्ट, विवेक कि कमी ,विद्या में बाधा ,परीक्षा में असफलता ,व्यापार में हानि ,शेयरों में घाटा तथा वाणी में दोष होता है | जिस भाव का स्वामी बुध होता है उस भाव से विचारित कार्यों व पदार्थों में असफलता व हानि होती है |

 गोचर में बुध

जन्म या नाम राशि से 2,4,6,8,10 व 11 वें स्थान पर बुध  शुभ फल देता है |शेष स्थानों पर बुध का भ्रमण अशुभ कारक  होता है |

जन्मकालीन चन्द्र से प्रथम स्थान पर बुध का गोचर अप्रिय वाणी का प्रयोग,चुगलखोरी,धन हानि ,सम्बन्धियों को हानि तथा अनादर करता है |

दूसरे स्थान पर बुध  का गोचर धन आभूषण कि प्राप्ति,विद्या लाभ,वाक् पटुता, उत्तम भोजन व सम्बन्धियों से लाभ कराता है ||

तीसरे स्थान पर बुध  का गोचर  भय ,बंधुओं से विवाद ,धन हानि,मित्र प्राप्ति कराता है |

चौथे स्थान पर बुध का गोचर माता का सुख,जमीन जायदाद का लाभ ,घरेलू सुख,बड़े लोगों से मैत्री कराता है |  |

पांचवें स्थान पर बुध  का गोचर मन में अशांति  ,संतान कष्ट ,योजनाओं में असफलता व आर्थिक चिंता करता है |

छ्टे स्थान पर बुध   का गोचर धन लाभ ,उत्तम स्वास्थ्य ,शत्रु पराजय , यश मान में वृद्धि देता  है| लेखन और कलात्मक कार्यों में प्रसिध्धि मिलती है |

सातवें स्थान पर बुध के  गोचर से स्त्री से विवाद ,शरीर पीड़ा,राज्य व उच्चाधिकारी से भय ,यात्रा –व्यवसाय में हानि और चिंता करता है |

आठवें स्थान पर बुध  के गोचर सेआकस्मिक धन प्राप्ति,सफलता,विजय व उह्ह सामजिक स्थिति देता है |

नवें  स्थान पर बुध  के  गोचर से  भाग्य हानि ,विघ्न ,धन मान कि हानि होती है |
दसवें  स्थान पर बुध  के  गोचर से पद प्राप्ति,शत्रु कि पराजय व्यवसाय में लाभ,यश व सफलता प्राप्त  होती है |

ग्यारहवें स्थान पर बुध के गोचर से आय वृध्धि ,व्यापार में लाभ , आरोग्यता, भूमि लाभ,भाइयों को सुख ,कार्यों में सफलता , संतान सुख  , मित्र सुख व हरे पदार्थों से लाभ होता है |
बारहवें   स्थान पर बुध  के  गोचर से  अपव्यय , स्थान हानि,स्त्री को कष्ट , शारीरिक कष्ट ,मानसिक चिंता होती है विद्या प्राप्ति में बाधा ,किसी कार्य कि हानि ,शत्रु से पराजय होती है |

( गोचर में बुध के उच्च ,स्व मित्र,शत्रु नीच आदि राशियों में स्थित होने पर , अन्य ग्रहों से युति ,दृष्टि के प्रभाव से , अष्टकवर्ग फल से या वेध स्थान पर शुभाशुभ ग्रह होने पर उपरोक्त गोचर फल में परिवर्तन संभव है | )

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बुध शान्ति के उपाय
जन्मकालीन बुध  निर्बल होने के कारण अशुभ फल देने वाला हो तो निम्नलिखित उपाय करने से बलवान हो कर शुभ फल दायक हो जाता है |
रत्न धारण – हरे  रंग का पन्ना सोने या चांदी की अंगूठी में आश्लेषा,ज्येष्ठा ,रेवती  नक्षत्रों में जड़वा कर बुधवार को सूर्योदय के बाद  पुरुष दायें हाथ की तथा स्त्री बाएं हाथ की कनिष्टिका अंगुली में धारण करें | धारण करने से पहले ॐ  ब्रां ब्रिं  ब्रों सः बुधाय  नमः मन्त्र के १०८ उच्चारण से इस में ग्रह प्रतिष्ठा करके धूप,दीप , लाल पुष्प, गुड  ,अक्षत आदि से पूजन कर लें |
दान व्रत ,जाप –   बुधवार  के नमक रहित व्रत रखें ,  ॐ  ब्रां ब्रीं ब्रों सः बुधाय  नमः मन्त्र का ९००० संख्या में जाप करें | बुधवार को कर्पूर,घी, खांड, ,हरे  रंग का वस्त्र और फल ,कांसे का पात्र ,साबुत मूंग  इत्यादि का दान करें | तुलसी को जल व दीप दान करना एवम  श्री विष्णु सहस्रनामस्तोत्र का पाठ करना भी शुभ रहता है |

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I have written many books on astrology like 1 Janam kundli Phalit Darpan 2 Prashan Phal Nirnay 3 Brihat Jyotish Gian 4 VimshottaryIDasha Phal Nirnay all from Manoj publications Burari Delhi. My articles on predictive astrology have been published in many renowned magzines like Kalyan( Gorakhpur),kadambni etc. I have started a new sereies' falit jyotish ka saral gyan ' on my this blog for the people who have keen interest in predictive vaidic astrology.My services are available online for analysis of horoscopes,match-making,Muhurat and other fields related to astrology I am also available on Tweet http://vaidicastrology.twitter.com/
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बुध ग्रह पुराणों व ज्योतिष शास्त्र में को 2 उत्तर

  1. Vinay Dixit कहते हैं:

    Budh ki uttpati swabhav karya tatha gochar ke phal ka vishlesanuttam hai.kintu ek jagah budh ke esthan me mangal misprint hai usko sahi kare.pathak bhrmit hoge.

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