विभिन्न राशियों के लिए वृश्चिक राशि में स्थित शनि का शुभाशुभ फल


विभिन्न राशियों के लिए वृश्चिक राशि  में स्थित शनि का शुभाशुभ फल
2-11-2014 से शनि का गोचर वृश्चिक राशि में हुआ है तथा 26-1-17 तक शनिदेव वृश्चिक राशि में ही रहेंगे | जन्म या नाम राशि से 3,6 ,11वें स्थान पर शनि शुभ फल देता है पर यदि जन्मकालीन शनि निर्बल ,अशुभ भावों का स्वामी , मारकेश ,पाप युक्त या दृष्ट ,अशुभ भावों में स्थित होने के कारण अशुभ कारक हो व अष्टक वर्ग में उस राशि में चार से कम शुभ बिंदु हों तो शनि का शुभ फल कम ही मिलेगा |शेष स्थानों पर शनि का भ्रमण प्रायः अशुभ कारक होता है पर जिनके शनि के अष्टक वर्ग में तुला राशि में चार या अधिक शुभ बिंदु प्राप्त हैं या जन्म कुंडली में शनि बलवान , शुभ भावों का स्वामी शुभ युक्त व शुभ दृष्ट हो कर शुभ फलदायक सिद्ध होता हो तो उनको जन्म या नाम राशि से 3,6 ,11वें स्थान से अतिरिक्त स्थान पर भी होने से शनि अशुभ कारक नहीं होगा | जन्म या नाम राशि के अनुसार प्रत्येक राशि का सामान्य शुभाशुभ फल इस अवधि में निम्नलिखित प्रकार से रहेगा——–
जन्म या नाम राशि मेष से शनि का गोचर अष्टम स्थान पर है जिसके स्वामी मंगल से शनि कि शत्रुता है | शनि का ढैय्या मेष राशि पर सोने के पाए में होने के कारण व्यय कि अधिकता ,कार्यों में बाधाएं , शत्रु पीड़ा ,वात विकार ,उदर विकार . कब्ज से होने वाले रोग , अर्श रोग ,मानसिक परेशानियां,संतान चिंता रहेंगी |
जन्म या नाम राशि वृष से शनि का गोचर सातवें स्थान पर है जिसके स्वामी शुक्र से शनि कि मैत्री है | ताम्बे का पाया भी मध्यम है| सातवें स्थान पर शनि के गोचर से कोई रुका हुआ कार्य पूर्ण होगा ,तीर्थ यात्रा होगी ,पत्नी, माता को कष्ट संभव है ,जमीन जायदाद से हानि होगी ,व्यवसाय में सफलता मिलेगी और व्यवसाय से सम्बन्ध में यात्रा होगी |
जन्म या नाम राशि मिथुन से शनि का गोचर छ्टे स्थान पर है | चांदी का पाया शुभ है | राशि के स्वामी बुध से शनि कि मैत्री है अतः धन लाभ, सुख वृद्धि ,रोग और शत्रु से मुक्ति और योजनाओं में सफलता मिलेगी |
जन्म या नाम राशि कर्क से शनि का गोचर पांचवें स्थान पर है| लोहे का पाया अशुभ कारक है| राशि स्वामी चन्द्र से शनि कि शत्रुता है | शिक्षा प्राप्ति में बाधा ,परिवार में विवाद , मुख रोग ,पेट में पीड़ा ,संतान को कष्ट ,चिंता ,सुख हीनता , मानसिक पीड़ा और बेचैनी और धन हानि होगी |
जन्म या नाम राशि सिंह से शनि का गोचर चौथे स्थान पर है| ताम्बे का पाया शुभ है | पर शनि का ढैय्या है और राशि स्वामी सूर्य से शत्रुताहै अतः फल में अशुभता ही अधिक रहेगी आवास तथा व्यवसाय में परेशानियां रहेंगी ,छाती में पीड़ा ,माता को कष्ट ,मानसिक बेचैनी ,स्थान परिवर्तन ,सम्बन्धियों से वियोग या अनबन हो सकती है |
जन्म या नाम राशि कन्या से शनि का गोचर तीसरे स्थान पर है| सोने का पाया मध्यम है | साढ़ेसाती उतर गई है | राशि के स्वामी बुध से शनि कि मैत्री है| आरोग्यता,सुखों में वृद्धि ,धन- संपत्ति का लाभ, परिवार में मेल मिलाप, भाई या बहिन के सुख में वृद्धि ,राज्य तथा व्यवसाय से लाभ,संतान सुख प्राप्ति तथा भाग्य में वृद्धि होगी |
जन्म या नाम राशि तुला से शनि का गोचर दूसरे स्थान पर है| साढ़ेसाती धन स्थान पर है |चांदी का पाया शुभ है | राशि स्वामी से शनि की मित्रता है अतः अचल संपत्ति और वाहन का लाभ होगा | कभी कभी धन हानि और परिवार में विवाद भी संभव है | कब्ज से होने वाला कोई रोग, नेत्र और दांत में पीड़ा हो सकती है |
जन्म या नाम राशि वृश्चिक से शनि का गोचर प्रथम स्थान पर है| साढ़ेसाती शरीर पर है लोहे का पाया अशुभ है | स्वामी मंगल से शनि कि शत्रुता है जिस से स्वास्थ्य हानि ,वात विकार ,विघ्न –बाधाएं,संघर्ष,गृहस्थ जीवन में बाधा ,रक्त विकार ,अर्श रोग,यात्रा में कष्ट ,राज्य से हानि और पिता को कष्ट संभव है |
जन्म या नाम राशि धनु से शनि का गोचर बारहवें स्थान पर है|| साढ़ेसाती चढ़ती हुई है | ताम्बे का पाया शुभ है | स्वामी गुरु से शनि कि समता है |धार्मिक कार्यों में व्यय ,नौकरी व्यवसाय में विघ्न , प्रवास ,आर्थिक हानि,किसी रोग पर व्यय हो सकता है |कभी कभी आकस्मिक लाभ और बिगड़े कामों में सुधार भी संभव है |
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जन्म या नाम राशि मकर से शनि का गोचर ग्यारहवें स्थान पर है| चांदी का पाया शुभ है |राशि स्वामी स्वयं शनि ही है | धन ऐश्वर्य की वृद्धि, लोहा –चमड़ा –कोयला –सीमेंट –पत्थर –लकड़ी –मशीनरी आदि से लाभ ,आय में वृद्धि ,रोग व शत्रु से मुक्ति , कार्यों में सफलता, मित्रों का सहयोग मिलेगा |
जन्म या नाम राशि कुम्भ से शनि का गोचर दसवें स्थान पर है |सोने का पाया मध्यम है | राशि स्वामी स्वयं शनि ही है | व्यवसाय तथा नौकरी में परिवर्तन ,असफलता,खर्चों की अधिकता,प्रवास,स्त्री को कष्ट ,आवास या वाहन से हानि तथा छाती में पीड़ा संभव है |
जन्म या नाम राशि मीन से शनि का गोचर नवम स्थान पर है| लोहे का पाया अशुभ है | स्वामी गुरु से शनि कि समता है |धन व भाग्य हानि,कार्यों में विघ्न ,रोग ,ऋण वृद्धि होगी |
शनि के अशुभ गोचर फल कि निवृत्ति के लिए निम्नलिखित शनि का स्तोत्र संध्या काल में नित्य जाप करेंऔर शनिवार को सरसों का तेल ,लोहा ,काले तिल ,काले उडद ,काला वस्त्र, लोंग ,नीलम ,कुल्थी का दान करें |
दशरथ कृत शनि स्तोत्र
नमः कृष्णाय नीलाय शितिकंठनिभाय च |नमः कालाग्नि रूपाय कृतान्ताय च वै नमः ||
नमो निर्मोसदेहाय दीर्घश्मश्रुजटाय च | नमो विशालनेत्राय शुष्कोदर भयाकृते ||
नमः पुष्कलगात्राय स्थूलरोम्णे च वै पुनः | नमो दीर्घाय शुष्काय कालद्रंष्ट नमोस्तुते||
नमस्ते कोटराक्षाय दुर्निरिक्ष्याय वै नमः| नमो घोराय रौद्राय भीषणाय करालिने ||
नमस्ते सर्व भक्षाय बलि मुख नमोस्तुते|सूर्य पुत्र नमस्तेऽस्तु भास्करेऽभयदाय च ||
अधोदृष्टे नमस्तेऽस्तु संवर्तक नमोस्तुते| नमो मंद गते तुभ्यम निंस्त्रिशाय नमोस्तुते ||
तपसा दग्धदेहाय नित्यम योगरताय च| नमो नित्यम क्षुधार्ताय अतृप्ताय च वै नमः||
ज्ञान चक्षुर नमस्तेऽस्तु कश्यपात्मजसूनवे |तुष्टो ददासि वै राज्यम रुष्टो हरसि तत्क्षणात ||
देवासुर मनुष्याश्च सिद्धविद्याधरोरगा | त्वया विलोकिताः सर्वे नाशं यान्ति समूलतः||
प्रसादं कुरु में देव वराहोरऽहमुपागतः ||

 

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