फलित ज्योतिष का सरल ज्ञान

फलित ज्योतिष का सरल ज्ञान

प्रस्तुत लेख श्रृंखला में क्रमबद्ध तरीके से भारतीय फलित ज्योतिष के रहस्यों  को बहुत ही सरल प्रकार से समझाया जाएगा |, ग्रह ,राशि नक्षत्र आदि  का विस्तृत वर्णन और फलित ज्योतिष में उनका महत्व ,जन्मकुंडली का पूर्ण विश्लेष्ण तथा  फलित ज्ञान , ग्रह दशा ,मुहूर्त,मिलान आदि विषयों को सरलता से प्रस्तुत किया जाएगा | विषयवस्तु के बारे में पाठकों की कोई जिज्ञासा होगी तो ब्लॉग https://astropoint.wordpress.com/ के माध्यम से उनके प्रश्नों का उत्तर भी दिया जाएगा | सर्व साधारण तक इस वैदिक विद्या  के सही रूप को पहुंचाना और ज्योतिष के नाम पर फैल रहे पाखण्ड से उनको बचाना  ही इस लेख का उद्देश्य है | पाठक  यदि रूचि लेते हुए ध्यान पूर्वक इस क्रमिक लेख का पूर्ण रूप से अध्ययन और मनन करेंगे तो निश्चित रूप से उन्हें फलित ज्योतिष का सम्पूर्ण ज्ञान हो जाएगा |

पहला अध्याय  

ज्योतिष शास्त्र का महत्त्व

प्राणी ने  अपने पूर्व जन्मों में जो भी शुभाशुभ  कर्म किये हैं उन  के शुभाशुभ फल  तथा उनकी प्राप्ति के समय का ज्ञान ज्योतिष शास्त्र द्वारा वैसे ही ज्ञात होता है जैसे अन्धकार में रखे पदार्थों का ज्ञान दीपक द्वारा प्रकाश करने पर होता है | बहुत ग्रंथों में कहा गया है कि जो होने वाला है वह कभी टल नहीं सकता और अनहोनी कभी हो नहीं सकती अर्थात भवितव्यता निश्चित तथा अपरिवर्तनीय है |  यहाँ यह प्रश्न स्वभाविक है कि यदि पूर्व जन्म में अर्जित शुभाशुभ फल का  इस जन्म में भोगना निश्चित ही है तो ज्योतिष शास्त्र के ज्ञान की क्या उपयोगिता है |जब हम किसी घटना के शुभाशुभ परिणाम को बदल ही नहीं सकते तो ज्योतिष शास्त्र की सहायता से उनके विषय में पहले ही से जान लेने का लाभ क्या है | इस प्रश्न में भाग्य की प्रबलता पर बल दिया गया है पर पुरुषार्थ का विचार नहीं किया गया है  | भाग्य कि प्रधानता से ही यदि कार्य सिद्ध होते तो शास्त्रों में स्थान स्थान पर पुरुषार्थ और कर्म के महत्त्व पर बल नहीं दिया जाता | पूर्व जन्म में उपार्जित भाग्य भी उद्योग किये बिना फलीभूत नहीं हो सकता |  दूसरी और पुरुषार्थ करने पर भी अनेक बार अनुकूल फल नहीं मिलता जिसका कारण स्पष्टतः भाग्य की प्रतिकूलता ही है | जैसे किसान खेत में अनाज उगाने के लिए हल चलाना ,बीज बोना ,खाद डालना ,पानी देना ,कीटनाशक डालना इत्यादि सभी प्रकार के कर्म करता है पर असामयिक वृष्टि ,ओला वृष्टि अथवा अन्य प्राकृतिक आपदा से फसल नष्ट हो जाए तो यही मानना होगा कि पुरुषार्थ करने पर भी भाग्य की प्रतिकूलता से अनुकूल फल प्राप्त नहीं हुआ |

वास्तव में  प्राणियों का जीवन रूपी रथ  दो चक्रों  भाग्य तथा उद्योग  पर आधारित है  | दोनों चक्रों से ही रथ चलता है | दोनों का ही महत्व समान है |यदि  किसी प्राणी की  जन्म पत्रिका ,प्रश्न या शकुन आदि के आधार पर  उसके पूर्व जन्मों के अशुभ कर्मों के कारण  विद्या ,विवाह या संतान आदि का अभाव निर्णीत होता है तो भी यज्ञ,दान ,जप और विशेष अनुष्ठान के माध्यम से उन अदृढ कर्मोपार्जित अशुभ कर्मों के प्रभाव को क्षीण करके उस अभाव को दूर किया जा सकता है | विद्वान व्यक्ति अपने पुरुषार्थ के द्वारा  अपने दुर्बल भाग्य को बदल सकता है |  यज्ञ,दान,व्रत –उपवास  ,जप और विशेष अनुष्ठान भी शास्त्रों में वर्णित पुरुषार्थ ही है जिस से भाग्य की प्रतिकूलता को अनुकूलता में बदला जा सकता है | ज्योतिष शास्त्र से हमें  अदृष्ट शुभ और अशुभ फल प्राप्ति के समय का ज्ञान होता है |अरिष्ट काल के ज्ञात होने पर हम भौतिक और आध्यात्मिक प्रयत्नों द्वारा उस का प्रतिकार कर सकते हैं जैसे वर्षा आने के लक्षण देख कर हम छाता साथ ले कर चलते हैं क्योंकि वर्षा को रोक पाना हमारे लिए संभव नहीं है पर छाते से हम अपना बचाव तो कर ही सकते हैं  |

ज्योतिष शास्त्र के मुख्य विभाग

वेद के अंग नेत्र के रूप में प्रतिष्ठित ज्योतिष शास्त्र के तीन मुख्य विभाग हैं  1. सिद्धांत 2. गणित 3.फलित  सिद्धांत  और गणित में में काल की गणना ,ग्रहों के संचार का ज्ञान ,पृथ्वी –नक्षत्र- ग्रहों की स्थिति आदि  का वर्णन होता है |

फलित में जातक,ताजिक,मुहूर्त,प्रश्न और संहिता पांच भेद हैं  |

1.जातक  अर्थात होरा शास्त्र में जन्मकुंडली के आधार पर  सभी प्राणियों के जीवन से सम्बंधित समस्त शुभाशुभ फलों का विचार किया जाता है |  बृहत्पराशरहोराशास्त्र ,बृहदजातक ,सर्वार्थ चिंतामणि,शम्भू होरा प्रकाश,सारावली,फलदीपिका ,होरा रत्नम , होरा सार ,जन्म कुंडली फलित दर्पण , बृहत् ज्योतिष ज्ञान,विंशोत्तरी दशा फल निर्णय , ज्योतिर्महानिबंध,चमत्कार चिंतामणि ,जातक पारिजात , इत्यादि प्रमुख जातक ग्रन्थ हैं|

2.ताजिक में वर्ष फल और मास फल का ज्ञान होता है  जो मुख्यतः यवनों द्वारा प्रतिपादित ज्योतिष शास्त्र से प्रभावित है |ताजिक नीलकंठी ,वर्ष फल चन्द्रिका मुख्य ताजिक ग्रन्थ हैं |

3.मुहूर्त में तिथि,नक्षत्र,वार ,लग्न इत्यादि का विचार करते हुए   सभी शुभाशुभ कार्य आरम्भ  करने के समय का निश्चय किया जाता है | वर –वधु के मिलान का विषय भी मुहूर्त शास्त्रों में ही  मिलता है | मुहूर्त चिंतामणि ,मुहूर्त गणपति ,बृहददैवज्ञरञजनम,मुहूर्त मार्तंड ,ज्योतिर्विदाभरण,ज्योतिर्निबंध ,विवाह वृन्दावन  इत्यादि प्रमुख मुहूर्त ग्रन्थ हैं |

4.प्रश्न  में प्रश्न कालिक समय के आधार पर किसी विशेष प्रश्न के शुभाशुभ फल का विचार किया जाता है | जिन व्यक्तियों को अपने जन्म समय का सही ज्ञान नहीं होता वे प्रश्न लग्न के माध्यम से अपने किसी भी प्रश्न का शुभाशुभ फल जान सकते हैं | प्रश्न फल निर्णय , दैवज्ञ वल्लभा ,प्रश्न ज्ञान, प्रश्न मार्ग ,प्रश्न वैष्णव,भुवन दीपक ,प्रश्न भूषण ,प्रश्न शिरोमणि  इत्यादि प्रमुख प्रश्न ग्रन्थ हैं |

5,संहिता में ग्रह चार तथा विश्व पर उसका प्रभाव  , नक्षत्रों का प्रभाव ,अर्घकांड,वास्तु विद्या, अंग विद्या ,उत्पात ,चेष्टा,शकुन,स्वप्न आदि विषयों का वर्णन किया गया है | बृहत् संहिता ,भद्र बाहू संहिता ,नारद संहिता ,वशिष्ठ संहिता, इत्यादि प्रमुख संहिता ग्रन्थ हैं |

उत्तम ज्योतिषी के लक्षण

बृहत् संहिता के अनुसार ज्योतिषी को पवित्र,देश काल को जानने  वाला ,व्यसनों से रहित,निर्मल चित्त वाला ,देव पूजन –व्रत उपवास करने वाला ,ग्रहों के गणित और फलित को जानने वाला ,सत्यवादी,प्रसन्न चित्त , पाखण्ड रहित ,राग द्वेष से रहित तथा शान्तिक-पौष्टिक कर्मों का ज्ञाता होना चाहिए |

दम्भी ,पाखंडी ,धन लोलुप ,अधार्मिक ,ज्योतिष शास्त्र में आस्था से रहित तथा लालची व्यक्ति को इस विद्या के अध्ययन का अधिकार नहीं है |

————-    क्रमशः

( दूसरे अध्याय में जन्म कुंडली तथा 12 राशियों का  वर्णन किया जाएगा | )

कृष्णकान्त भारद्वाज

https://astropoint.wordpress.com/

About kantkrishan

I have written many books on astrology like 1 Janam kundli Phalit Darpan 2 Prashan Phal Nirnay 3 Brihat Jyotish Gian 4 VimshottaryIDasha Phal Nirnay all from Manoj publications Burari Delhi. My articles on predictive astrology have been published in many renowned magzines like Kalyan( Gorakhpur),kadambni etc. I have started a new sereies' falit jyotish ka saral gyan ' on my this blog for the people who have keen interest in predictive vaidic astrology.My services are available online for analysis of horoscopes,match-making,Muhurat and other fields related to astrology I am also available on Tweet http://vaidicastrology.twitter.com/
यह प्रविष्टि ज्योतिष शास्त्र से सम्बंधित विभिन्न शोध पूर्ण लेख में पोस्ट और टैग की गई थी। बुकमार्क करें पर्मालिंक

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